- सर्वाधिक वेंडर पंजीयन श्रेणी में मिला देश में दूसरा स्थान, 1222 वेंडर हुए पंजीकृत
रायपुर। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित “पीएम सूर्य घर उत्कृष्टता पुरस्कार” में छत्तीसगढ़ को “माह का सौर अभियान – सर्वाधिक वेंडर पंजीयन” श्रेणी में देशभर में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है।
प्रमुख सचिव (ऊर्जा) एवं पावर कंपनीज़ के अध्यक्ष सुबोध कुमार सिंह ने इस उपलब्धि पर विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान राज्य में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
राज्य ने एक माह के दौरान 86 नए वेंडरों का पंजीयन कर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में अब तक कुल 1222 वेंडर पंजीकृत हो चुके हैं। विशेष बात यह है कि राज्य ने महिला स्व-सहायता समूहों को भी वेंडर के रूप में जोड़कर योजना के दायरे को और व्यापक बनाया है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष सारंगी ने इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव विकासशील को पत्र भेजकर सम्मान की जानकारी दी है। पत्र में उन्हें 4 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम “प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के दो वर्ष एक करोड़ सौर छतों की ओर बढ़ता भारत” में शामिल होकर राज्य की ओर से पुरस्कार ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
योजना में तेजी से बढ़ रही भागीदारी
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा अपनाने के प्रति लोगों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। 1 जून 2026 की स्थिति में राज्य में 1 लाख 93 हजार 371 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 61 हजार 700 घरों में सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 1 लाख 32 हजार 28 आवेदनों पर स्थापना कार्य प्रगति पर है।
योजना के सकारात्मक परिणामों के रूप में अब तक 16 हजार उपभोक्ताओं को शून्य बिजली बिल का लाभ मिल चुका है। वहीं, 45 हजार 978 हितग्राहियों को केंद्र सरकार से 353.20 करोड़ रुपये तथा 40 हजार 910 हितग्राहियों को राज्य सरकार से 122.62 करोड़ रुपये की अनुदान राशि प्रदान की जा चुकी है।
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में मिली यह राष्ट्रीय उपलब्धि राज्य को स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा की दिशा में नई पहचान दिलाने के साथ-साथ आम नागरिकों को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करने में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।