You are currently viewing सांख्यिकी मंत्रालय के एक सर्वेक्षण से हफ्ते में एक घंटा काम भी रोजगार, फिर भी 48% बेरोजगार

सांख्यिकी मंत्रालय के एक सर्वेक्षण से हफ्ते में एक घंटा काम भी रोजगार, फिर भी 48% बेरोजगार

 एक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में केवल 51.7% लोगों को रोजगार मिला है, जबकि 48% बेरोजगार हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति थोड़ी बेहतर है। महिलाओं की भागीदारी भी कम है, जिसमें शहरों में 23%…

नई दिल्ली। देश में रोजगार की स्थिति क्या है, इसका अंदाजा सांख्यिकी मंत्रालय के एक सर्वेक्षण से लगाया जा सकता है। इसमें सप्ताह में एक घंटे काम करने वाले को भी रोजगार के दायरे में रखा गया है। इसके बावजूद सिर्फ 51.7 फीसदी लोगों को ही रोजगार मिला। यानी 48 फीसदी से अधिक के हाथों में काम नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति शहरों की तुलना में थोड़ी बेहतर है। सर्वेक्षण मई 2025 के दौरान किया गया। इस रिपोर्ट को हाल में जारी किया गया है। वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (डब्ल्यूपीआर) में रोजगार की ताजा साप्ताहिक स्थिति (सीडब्ल्यूएस) की पहचान की गई।

इसमें 15 साल से अधिक उम्र की उस आबादी को चिह्नित किया गया, जिन्हें बीते सप्ताह के दौरान कम से एक घंटे या उससे अधिक समय तक कोई काम मिला। ऐसा काम किया जिसके बदले उन्हें भुगतान किया गया। ऐसे लोगों की कुल संख्या महज 51.7 फीसदी रही। शहरों में यह प्रतिशत और भी कम 46.9 तथा गांवों में 54.1 फीसदी दर्ज किया गया। दरअसल, अर्थव्यवस्था में श्रमिकों की भागीदारी को जानने के लिए साप्ताहिक मासिक आधार पर दिनों, घंटों के काम के आधार पर सर्वेक्षण होते हैं। ऐसा रुझान पूरी दुनिया में है। यदि कोई मैकेनिक एक किसी घर में जाकर बिजली का काम करता है तथा उसमें दो घंटे लगते हैं तो यह रोजगार तो है क्योंकि उसे भुगतान होता है। जबकि पूरे दिन के हिसाब से उसका कार्य गणना में नहीं आ पाएगा। इस प्रकार के और भी कार्य हैं। – महिलाओं की भागीदारी अभी भी बहुत कम ये आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार का काम शहरों की अपेक्षा थोड़ा बेहतर मिल रहा है। लेकिन महिलाओं की भागीदारी इसमें अभी भी बहुत कम है। सर्वेक्षण के अनुसार, शहरों में 70.5 फीसदी पुरुष और 23 फीसदी महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी पाई गई यानी उन्होंने कोई न कोई कार्य किया, जिसके बदले उन्हें मजदूरी मिली। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 74.2 फीसदी पुरुष और 35.2 फीसदी महिलाओं को ऐसा काम मिला। – ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ीं ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य में लोगों की भागीदारी ज्यादा होने के पीछे कई वजह हैं। संभवत: मनरेगा जैसी योजनाओं के चलते वहां कार्य की उपलब्धता शहरों की तुलना में थोड़ा अधिक है। दूसरे, ग्रामीण क्षेत्रों में भी जीवनशैली की गतिविधियां शहरों की तरह बढ़ रही हैं। इससे वहां स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हो रहा है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं।