सर्वप्रथम टीम विशेष बस द्वारा मैकल पर्वत श्रृंखला में समुद्र तल से लगभग 807 मीटर की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध हिल स्टेशन चिल्फी घाटी पहुंची। घने वनों, समृद्ध जैव विविधता, घुमावदार पहाड़ी मार्गों और मनोहारी प्राकृतिक दृश्यों को देखकर विद्यार्थी रोमांचित हुए। यहां विद्यार्थियों ने पर्वतीय भू-आकृतियों एवं प्राकृतिक पर्यावरण का अवलोकन किया।इसके पश्चात छात्र-छात्राओं ने लगभग 2 किलोमीटर के पथरीले मार्ग और 200 सीढ़ियों का आरोहण कर रानीदहरा जलप्रपात का भ्रमण किया। त्रिस्तरीय इस मौसमी जलप्रपात में वर्षा ऋतु के दौरान जलधारा अपने पूर्ण वेग एवं सौंदर्य में प्रवाहित होती है। विद्यार्थियों ने जल अपरदन से विदीर्ण चट्टानों, स्थलाकृति एवं क्षेत्र की जैव विविधता का अध्ययन किया। यह क्षेत्र औषधीय पौधों और वन्य जीवों के लिए भी प्रसिद्ध है।
भ्रमण के अगले चरण में टीम भोरमदेव शासकीय शक्कर कारखाना पहुंची, जहां विद्यार्थियों ने शक्कर निर्माण की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। मार्ग में गन्ने से गुड़ निर्माण करने वाली अनेक लघु इकाइयों का भी अवलोकन किया गया, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि आधारित उद्योगों की समझ विकसित हुई।
अंतिम चरण में सर्वे दल ने 11वीं शताब्दी में निर्मित प्राचीन एवं प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर का अध्ययन किया, जो भगवान शिव को समर्पित है। नागर शैली में निर्मित यह मंदिर नागवंशी राजा गोपालदेव द्वारा बनवाया गया था और इसे ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ भी कहा जाता है। मैकल पर्वत श्रेणी की तलहटी में सुंदर तालाब के किनारे स्थित इस मंदिर की पत्थरों पर की गई सूक्ष्म नक्काशी उस काल की उत्कृष्ट शिल्पकला का जीवंत प्रमाण प्रस्तुत करती है।
इस शैक्षणिक फील्ड सर्वे के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण अध्ययन, प्राकृतिक सौंदर्य, जल अपरदन की प्रक्रिया, भौगोलिक लैण्डस्केप, कृषि आधारित उद्योग तथा प्राचीन मंदिर स्थापत्य कला के संबंध में व्यावहारिक एवं महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। विभागाध्यक्ष डॉ. द्विवेदी ने बताया कि ऐसे भ्रमण विद्यार्थियों के शैक्षणिक ज्ञान को व्यवहारिक अनुभव से जोड़ने में सहायक सिद्ध होते हैं।