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खुद की फार्मेसी से दवा खरीदने के लिए मरीजों पर नहीं डाल सकते दबाव निजी अस्पताल

  • लगाना होगा बोर्ड, जिसमें लिखा होगा- अस्पताल से दवा खरीदना अनिवार्य नहीं
  • ड्रग विभाग ने प्रदेशभर में जारी किया फरमान, मॉनिटरिंग पर उठ रहे सवाल

रायपुर। प्रदेश के सभी निजी अस्पताल अब मरीजों को खुद की फार्मेसी से दवा लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। ड्रग विभाग ने इस संबंध में सभी जिलों को एक आदेश जारी किया है। इसमें निजी अस्पतालों को बोर्ड लगाकर मरीजों को यह बताना होगा कि उनके मेडिकल स्टोर से दवा खरीदना अनिवार्य नहीं है।

राजधानी के कई निजी अस्पतालों में डॉक्टर मरीजों को प्रिस्क्रिप्शन नहीं दे रहे हैं। यही नहीं खुद के फार्मेसी स्टोर से दवा खरीदने का दबाव भी बना रहे हैं। इस मामले में पिछले साल मार्च में सीएमएचओ ने सभी अस्पतालों, मेटरनिटी होम व क्लीनिक संचालकों को पत्र लिखकर मरीजों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं करने को कहा था। दवाओं में छूट नहीं देने से मरीजों का नुकसान होने की बात भी कही गई थी। सीएमएचओ ने यह भी कहा था कि मरीजों को खुद के मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए दबाव न डालें। ड्रग विभाग के नए आदेश से स्पष्ट है कि सीएमएचओ के आर्डर का किसी भी निजी अस्पताल वालों ने पालन नहीं किया।

फार्मेसी मतलब भारी मुनाफा अस्पताल की फार्मेसी को, लुट रहे मरीज 

निजी अस्पतालों की फार्मेसी में एमआरपी पर दवा, इंजेक्शन समेत जरूरी कंज्यूमेबल आइटम बेचे जाते है। इससे अस्पताल या ठेका लेने वाले वेंडर को भारी मुनाफा होता है। मरीजों के कहने के बाद भी छूट नहीं दी जाती। राजधानी में दो दर्जन बड़े निजी अस्पताल समेत 500 से ज्यादा निजी अस्पताल, मेटरनिटी होम व क्लीनिक है। कुछ निजी अस्पतालों में इलाज के बाद मरीजों को प्रिस्क्रिप्शन नहीं देकर सीधे मेडिकल स्टोर से दवा खरीदवाना चौकाने वाला है। मामले का खुलासा तब हुआ, जब एक व्यक्ति ने कलेक्टर कार्यालय स्थित जनशिकायत निवारण प्रकोष्ठ में की।

चिकित्सा के दौरान दवाओं के मूल्य मनमाने ढंग से 

निजी अस्पतालों व मेडिकल स्टोर संचालक अब मनमाने ढंग से दवाओं व इंजेक्शन के मूल्य प्रिंट करवा रहे हैं। यही कारण है कि अस्पताल की फार्मेसी में दवाएं काफी महंगी होती है। फार्मेसी का संचालन या तो खुद अस्पताल प्रबंधन करता है या इसे सालाना करोड़ों रुपए के ठेके पर दिया जाता है।