उरला उद्योग संगठन के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों के कथन अनुसार वर्तमान में ही छत्तीसगढ़ में औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए विद्युत दरें अन्य राज्यों की तुलना में अधिक हैं। अभी उद्योगों को लगभग 8 से 10 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध हो रही है, जो प्रस्तावित वृद्धि के बाद सभी करों सहित बढ़कर लगभग 12 से 14 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच सकती है। उनका मानना है कि यदि यह वृद्धि लागू होती है तो प्रदेश के उद्योगों की उत्पादन लागत में भारी इजाफा होगा और वे अन्य राज्यों के उद्योगों की तुलना में प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे।
उद्योग संगठन के सदस्यों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण पहले से ही व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हैं। ऐसे समय में विद्युत दरों में अप्रत्याशित वृद्धि उद्योगों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर सकती है। इससे उत्पादों के विपणन में कठिनाइयां बढ़ेंगी और प्रदेश के औद्योगिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उद्योग संगठनों ने यह भी आशंका जताई है कि राज्य सरकार द्वारा बाहरी निवेश आकर्षित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। यदि बिजली दरें अत्यधिक बढ़ती हैं तो प्रस्तावित निवेश परियोजनाएं असमंजस की स्थिति में आ सकती हैं और नए निवेशक अन्य राज्यों की ओर रुख कर सकते हैं।
उद्योग जगत ने राज्य शासन से आग्रह किया है कि प्रस्तावित टैरिफ वृद्धि पर पुनर्विचार किया जाए और उद्योग हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित निर्णय लिया जाए। साथ ही, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए राज्य में केप्टिव सौर ऊर्जा परियोजनाओं को आर्थिक प्रोत्साहन देने की मांग भी की गई है, ताकि उद्योगों को सस्ती और स्थायी ऊर्जा उपलब्ध हो सके तथा प्रदेश औद्योगिक विकास की दिशा में सकारात्मक योगदान दे सके।