एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को संबोधित ज्ञापन में वेदांता समूह के चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल के विरुद्ध दर्ज FIR पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठन का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से उद्योग जगत में नकारात्मक संदेश जा रहा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि किसी भी औद्योगिक इकाई में सुरक्षा मानकों के पालन और संचालन की जिम्मेदारी स्थानीय प्रबंधन एवं तकनीकी विशेषज्ञों की होती है, जबकि चेयरमैन स्तर के अधिकारी नीतिगत निर्णयों तक सीमित रहते हैं और दैनिक संचालन में उनकी सीधी भूमिका नहीं होती।
संगठन ने यह भी उल्लेख किया कि इस तरह की कार्रवाई से निवेशकों का मनोबल प्रभावित हो सकता है। प्रमुख उद्योगपति नवीन जिंदल और पूर्व राज्यपाल किरण बेदी जैसे व्यक्तित्वों द्वारा भी शीर्ष नेतृत्व पर सीधे FIR दर्ज करने को अनुचित बताया गया है, जिससे उद्यमियों में असुरक्षा की भावना बढ़ने की आशंका है।
एसोसिएशन ने इसे एक अनुचित मिसाल बताते हुए कहा कि यदि हर तकनीकी दुर्घटना के लिए सीधे उच्च स्तर के प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया जाएगा, तो भविष्य में निवेशक नए उद्योग स्थापित करने से हिचकेंगे, जिसका असर राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर पड़ेगा।
संगठन ने मांग की है कि मामले की जांच निष्पक्ष रूप से की जाए और जिम्मेदारी केवल उन अधिकारियों एवं तकनीकी कर्मियों तक सीमित रखी जाए, जिनकी भूमिका सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों के पालन से जुड़ी है।
ज्ञापन की प्रतिलिपि राज्य के गृहमंत्री, उद्योग मंत्री, गृह सचिव, उद्योग सचिव, पुलिस महानिरीक्षक (IG) एवं संबंधित विभागों के प्रमुख अधिकारियों को भी प्रेषित की गई है, ताकि मामले में समन्वित एवं न्यायसंगत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
अंत में, एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री संजय त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से इस मामले में हस्तक्षेप कर श्री अनिल अग्रवाल का नाम FIR से हटाने के निर्देश देने का अनुरोध किया है, ताकि न्यायसंगत प्रक्रिया का पालन हो सके और औद्योगिक वातावरण में विश्वास बना रहे।