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सोलर प्लांट से उद्योगों को बिजली आसान, अब नियामक आयोग के मंजूरी की नहीं आवश्यकता 

  • डेडिकेटेड फीडर की शर्त खत्म, उद्योगों को सोलर से सीधी सप्लाई

रायपुर। उद्योगों को सोलर प्लांट से बिजली लेने के लिए, अब राज्य विद्युत नियामक आयोग के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। आयोग ने नियमों में संशोधन करते हुए डेडिकेटेड फीडर यानी अलग बिजली लाइन की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। नई अधिसूचना के अनुसार अब ऐसे औद्योगिक उपभोक्ता, जो अलग फीडर

से जुड़े नहीं हैं, वे भी राज्य के भीतर स्थापित सोलर परियोजनाओं से ओपन एक्सेस के माध्यम से सीधे उद्योगों को सस्ती और हरित ऊर्जा तक पहुंच आसान होगी। नियामक आयोग के अधिकारियों के मुताबिक पहले उद्योगों को सोलर प्लांट से बिजली लेने के लिए राज्य विद्युत नियामक आयोग में आवेदन करना पड़ता था। डेढ़ से दो महीने तक उसकी सुनवाई चलती थी और अनुमति मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होती थी। इसके बाद वह फाइल पॉवर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को भेजी जाती थी, कई मामलों में तकनीकी कारणों से अनुमति मिलने में और भी देरी होती थी। इस संबंध में अब राज्य सरकार के आदेश के बाद ऊर्जा विभाग के अंतर्गत, विभाग के उप सचिव मथुरा प्रसाद पटेल के हस्ताक्षर से अधिसूचना जारी कर दी गई है।

पूर्व का नियम:-

  • सोलर बिजली के लिए आयोग में आवेदन आवश्यक
  • डेढ़ से दो महीने में सुनवाई
  • डेडिकेटेड फीडर अनिवार्य
  • प्रक्रिया में कई स्तर की मंजूरी

अब ऐसे राहत:-

  • आयोग की अलग मंजूरी की जरूरत नहीं
  • डेडिकेटेड फीडर की शर्त खत्म
  • ओपन एक्सेस से सीधी बिजली
  • उद्योगों को सस्ती हरित ऊर्जा का विकल्प

निवेश बढ़ाने का उद्देश्य, लागत होगी कम

औद्योगिक संगठनों के मुताबिक नए नियम लागू होने के बाद उद्योग सीधे ओपन एक्सेस के जरिए सोलर प्लांट से बिजली ले सकेंगे। डेडिकेटेड फीडर की बाध्यता हटने से उन उद्योगों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। इससे निजी सोलर परियोजनाओं में निवेश भी बढने की संभावना है और उद्योग अपनी बिजली लागत कम कर सकेंगे। हालांकि यह सुविधा केवल औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए लागू होगी, जो सोलर स्रोत से बिजली उत्पादन या खरीद करना चाहते हैं। अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल पुराने नियम ही लागू रहेंगे।