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भारत का नया क्रिटिकल मिनरल प्लान: चार राज्यों में बनेंगे प्रोसेसिंग पार्क, लिथियम और निकेल पर खास जोर

भारत सरकार देश को ग्रीन एनर्जी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए चार राज्यों में क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पार्क स्थापित करेगी। इन पार्कों में लिथियम और निकेल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन बढ़ेगा।

  • चार राज्यों में क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पार्क स्थापित होंगे।
  • लिथियम और निकेल पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  • बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

नई दिल्ली। भारत सरकार देश को ग्रीन एनर्जी की ओर ले जाने और तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। खान मंत्रालय के अनुसार, देश में बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन को गति देने के लिए चार खास राज्यों में क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पार्क बनाए जाएंगे।

बता दें कि यह पार्क देश के चार प्रमुख राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में स्थापित किए जाएंगे। इस पार्क के जरिए फिलहाल पूरा जोर लिथियम और निकेल पर है, क्योंकि ये दोनों बैटरियों के निर्माण के लिए सबसे जरूरी तत्व हैं। आने वाले समय में अन्य जरूरी खनिजों पर भी काम किया जाएगा।

एक ही छत के नीचे पूरा होगा काम

खान सचिव केशव चंद्र ने बताया कि इन पार्कों को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि वहां खनिजों की प्रोसेसिंग से लेकर उससे जुड़ी आगे की सभी इंडस्ट्रीज एक ही जगह पर मौजूद हों। इससे समय और लागत दोनों की बचत होगी।

किसकी क्या जिम्मेदारी होगी?

गौर करने वाली बात यह है कि इन पार्कों की योजना बनाने और जमीन पर उतारने का मुख्य जिम्मा राज्य सरकारों का होगा। केंद्र सरकार इसमें तकनीकी सहायता और पूरा सहयोग देगी। इसके लिए केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर इसमें सहयोग मांगा है।

नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन में क्या खास?

  • यह पूरी योजना सरकार के ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ का हिस्सा है।
  • इस मिशन के लिए सरकार ने 7 साल में 34,300 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है।
  • इसमें से 16,300 करोड़ रुपये सरकार द्वारा और 18,000 करोड़ रुपये सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा लगाए जाएंगे।

अब समझिए यह कदम क्यों है जरूरी?

गौरतलब है कि तांबा, लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्व जैसे खनिज विंड टर्बाइनों, बिजली नेटवर्क, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और बैटरी निर्माण के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। ग्लोबल मार्केट में बैटरी की भारी मांग को देखते हुए भारत इनकी घरेलू सप्लाई चेन मजबूत करना चाहता है ताकि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर न रहना पड़े।