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IMACG का एक बड़ा फैसला… अगर निजी अस्पतालों को 10 दिन में आयुष्मान योजना का नहीं मिला फंड तो इलाज  होगा बंद

रायपुर। आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों का करोड़ों रुपए के बकाया भुगतान शासन द्वारा नहीं किया गया है। बकाया भुगतान को लेकर अब प्राइवेट अस्पताल संचालक लामबंद हो चुके हैं। अस्पताल संचालकों ने 10 दिन के भीतर बकाया रकम जारी नहीं करने पर आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद करने की चेतावनी दी है। रविवार को आयोजित  आईएमए की बैठक में इस संबंध में फैसला लिया गया। रायपुर मेडिकल कॉलेज के सभागार में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की बैठक आयोजित की गई। अस्पताल संचालकों ने बैठक में कहा कि सरकार आयुष्मान योजना से इलाज कराने के बाद भुगतान करना भूल गई है। इससे अस्पताल वालों को कई तरह की आर्थिक परेशानी भी हो रही है। इसके साथ ही डॉक्टरों ने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत योजना में अधिकतर बीमारियों के इलाज का जो पैकेज रखा गया है, वो तर्कसंगत नहीं है। इलाज में जितना खर्च होता है उतनी रकम भी सरकार की ओर से नहीं मिलती है। ऐसे में योजना के तहत इलाज करना भी मुश्किल है। बैठक में प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ आईएमए के अध्यक्ष डॉ. अनूप वर्मा, बिल्डिंग कमेटी के अध्यक्ष डॉ. कमलेश्वर अग्रवाल, रायपुर आईएमए के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सोलंकी, सचिव डॉ. संजीव श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ हॉस्पिटल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र शुक्ला सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।

पिछले पांच माह से भुगतान लंबित हैः एसोसिएशन

बैठक में आईएमए के सदस्यों ने बताया कि आयुष्मान फंड से पिछले पांच माह से भुगतान नहीं किया जा रहा है। मंझोले और छोटे अस्पतालों के संचालन में काफी आर्थिक कठिनाइयों आ रही है। एसोसिएशन का दावा है कि अस्पताल संचालन के लिए जरूरी सभी चिकित्सकीय उपकरणों, दवाइयों एवं अन्य सामग्रियों की कीमत तथा नर्सिंग एवं पैरामेडिकल जैसे मानव संसाधनों की सैलरी बहुत ज्यादा बढ़ गई है। उपकरणों के मेंटेनेंस और नई मशीनों का खर्चा भी बेहद बढ़ गया है। ऐसे में कई साल पुराने रेट में इलाज करना भी मुमकिन नहीं है।

डॉक्टरों ने कहा-गाइडलाइन के खिलाफ बनी वेबसाइट

आईएमए के डॉक्टरों ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत नि अस्पतालों की संबद्धता के लिए लागू होम पोर्टल की गाइडलाइन को काफी कठिन बताया। उनका कहना है कि इस पोर्टल के निर्देशानुसार 20 बिस्तर के अस्पतालों के लिए 3 एमबीबीएस डॉक्टर की उपलब्धता बताई गई है जो पूरी तरह से अव्यवहारिक है। इसी तरह मझोले और छोटे अस्पतालों के लिए इस पोर्टल के अनेक निर्देशों को लागु करना लगभग असंभव है। एक छोटा अस्पताल तीन एमबीबीएस डॉक्टर खर्चा कैसे वहन करेगा।

हर महीने 15 से 20 हजार रु. तक वसूल रहे यूजर चार्ज

आईएमए ने अस्पतालों और क्लीनिक में लागू बायोमेडिकल वेस्ट प्रक्रिया और यूजर चार्ज की दरों को भी अव्यवहारिक बताया है। डॉक्टरों का कहना है कि छोटे क्लीनिक से हर महीने 15 से 20 हजार रुपए यूजर चार्ज वसूला जा रहा है, जो पूरी तरह से असंगत है। इस तरह के क्लिनिक से बायो मेडिकल वेस्ट बेहद कम निकलता है। इतना चार्ज होता ही नहीं है। आईएमए का आरोप है कि अभी रायपुर, दुर्ग व भिलाई के अस्पतालों के बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए एक ही एजेंसी का एकाधिकार है। इससे एजेंसी मनमाने ढंग से शुल्क वसूल रही है।