- सुरक्षा उपकरणों को लेकर कंपनी प्रबंधन की बड़ी लापरवाही
बीरगांव। प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक सुरक्षा की अनदेखी अब लगातार जानलेवा साबित हो रही है। सिलतरा सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला एसकेएस इस्पात सिलतरा रायपुर का है, जहां एक युवा हेल्पर की दर्दनाक मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। मृतक पुष्पेंद्र साहू (25 वर्ष), निवासी कतनई-अकलतरा, जिला जांजगीर-चांपा, एसकेएस इस्पात फैक्ट्री की रोलिंग मिल में कार्यरत था। शनिवार 04 मई को काम के दौरान मशीन के पट्टे में उसका कान फंस गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रारंभिक तौर पर यह माना जा रहा है कि यदि आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का उपयोग किया जाता या मशीनों पर पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध होते, तो यह हादसा टल सकता था। इस घटना ने एक बार फिर उद्योगों में सुरक्षा मानकों की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है।
पुष्पेंद्र अपने माता-पिता का इकलौता सहारा था, उसकी असमय मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। वहीं सूचना मिलते ही मृतक के शुभचिंतक और क्रांति सेना के सदस्य मौके पर पहुंच गए और फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए मुआवजे एवं कार्रवाई की मांग को लेकर देर रात तक धरना-प्रदर्शन किया। वही हो रही इस घटना को लेकर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। बीते कुछ समय से आकस्मिक निरीक्षणों में कमी देखी जा रही है, जिसके चलते कई फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी आम हो गई है। हाईकोर्ट से लेकर राज्यपाल तक श्रमिक सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश दिए जा चुके हैं, जिसमें यहां तक कि आईएएस अधिकारियों को भी निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन आदेशों का प्रभाव नगण्य दिखाई देता है। स्थिति यह है कि कहीं सुरक्षा उपकरणों की कमी है तो कहीं मशीनों की सुरक्षा व्यवस्था अधूरी है, और इसका खामियाजा श्रमिकों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
उद्योग प्रबंधन की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता के कारण प्रदेश में औद्योगिक दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो ऐसे हादसे आगे भी जारी रहेंगे, और निर्दोष श्रमिक इसी तरह अपनी जान गंवाते रहेंगे।