- 1 अप्रैल 2026 से भारत के लेबर कोड और टैक्स नियमों में क्रांतिकारी बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जो नौकरीपेशा लोगों के लिए ‘गेमचेंजर’ साबित होंगे. नए ‘कोड ऑन वेजेज, 2019’ (Code on Wages, 2019) के तहत अब इस्तीफा देने या नौकरी से निकाले जाने पर कंपनियों को केवल 2 वर्किंग डेज के भीतर फुल एंड फाइनल (F&F) सेटलमेंट करना अनिवार्य होगा।
आज 1 अप्रैल 2026 से लागू हो रहे नए श्रम नियमों के तहत नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। Code on Wages, 2019 के प्रावधानों के अनुसार अब किसी भी कर्मचारी के इस्तीफा देने, नौकरी से निकाले जाने या छंटनी की स्थिति में कंपनी को उसका फुल एंड फाइनल (F&F) सेटलमेंट महज 2 कार्य दिवस यानी 48 घंटे के भीतर करना अनिवार्य होगा। अब तक कर्मचारियों को अपनी बकाया सैलरी, लीव एनकैशमेंट और अन्य भुगतान के लिए 45 से 90 दिनों तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे आर्थिक परेशानियां खड़ी हो जाती थीं। नए नियम के लागू होने के बाद कंपनियों द्वारा देरी करना कानूनी उल्लंघन माना जाएगा और कर्मचारी लेबर विभाग में शिकायत कर ब्याज की मांग भी कर सकेंगे।
नए प्रावधानों में ग्रेच्युटी को लेकर भी राहत दी गई है। नौकरी छोड़ने की स्थिति में पात्र कर्मचारियों को 30 दिनों के भीतर ग्रेच्युटी का भुगतान करना होगा। साथ ही सैलरी स्ट्रक्चर में भी बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत बेसिक सैलरी को कुल CTC का कम से कम 50 प्रतिशत रखना अनिवार्य होगा। इससे जहां एक ओर कर्मचारियों का पीएफ और ग्रेच्युटी फंड बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर टेक-होम सैलरी में मामूली 2 से 5 प्रतिशत तक की कमी संभव है। हालांकि यह बदलाव कर्मचारियों के दीर्घकालीन वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए नियम से आईटी, बीपीओ और रिटेल सेक्टर की कंपनियों पर 5 से 15 प्रतिशत तक अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। ऐसे में कंपनियां भविष्य में वेतन वृद्धि और लागत प्रबंधन को लेकर नई रणनीति अपना सकती हैं। वहीं कर्मचारियों को सलाह दी गई है कि वे नौकरी छोड़ने से पहले अपना नोटिस पीरियड पूरा करें, निवेश से जुड़े दस्तावेज समय पर जमा करें और अपनी कंपनी के एचआर से नए नियमों के अनुसार पे-रोल अपडेट की जानकारी जरूर लें।
कुल मिलाकर, 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला यह नया नियम कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करने वाला साबित होगा और उन्हें आर्थिक व मानसिक रूप से अधिक सुरक्षित बनाएगा। अब कंपनियों के लिए कर्मचारियों का भुगतान रोककर रखना आसान नहीं होगा, जिससे नौकरी बदलना पहले के मुकाबले अधिक सरल और भरोसेमंद हो जाएगा।