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JSW के नाम पर भूमि आवंटन निरस्त, पूरी जमीन लैंड बैंक में

  • कभी भी दूसरी कंपनी को हो सकता है आवंटन, पांच गांवों की करीब 350 हे. भूमि का होना था अधिग्रहण

रायगढ़। करीब 20 साल पहले रायगढ़ तहसील के पांच गांवों में जेएसडब्ल्यू ने पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया था। भूमि अधिग्रहण की प्रकिया भी हो चुकी है। लेकिन प्लांट नहीं लग सका। अब कहा जा रहा है कि कोई दूसरी कंपनी इस प्रोजेक्ट को टेकओवर कर सकती है। वर्ष 2005 से लेकर 2010 के बीच रायगढ़ जिले में कई कारखाने लगाने के लिए एमओयू साइन हुए थे। सरकार ने भी कंपनियों से निवेश कराने में सफलता पाई थी। ज्यादातर उद्योग लग गए लेकिन कुछ फेल हो गए। इनमें एक नाम जेएसडब्ल्यू एनर्जी का भी है। रायगढ़ तहसील के कुकुर्दा, नवापारा, डूमरपाली, छुहीपाली और साल्हेओना में जेएसडब्ल्यू का पावर प्लांट लगना था जिसका भू-अर्जन ही पूरा नहीं हो सका।

2009 में टीओआर भी जारी हो गया था। पांच गांवों की 321 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण भी हो चुका है। लेकिन कंपनी ने भूमि का पजेशन नहीं लिया। करीब 15 सालों से प्लांट लगने के कयास ही लगते रहे। तब प्रोजेक्ट की लागत 7300 करोड़ आंकी गई थी जो अब दोगुनी हो चुकी है। अब इस प्रोजेक्ट को लेकर कुछ हलचल देखी जा रही है। इतने सालों में भी जमीन पर पजेशन नहीं लेने के कारण प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया है। किसान अब भी अपनी जमीन पर काबिज हैं और खेती कर रहे हैं। अब कहा जा रहा है कि जेएसडब्ल्यू ने इस प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए हैं। कोई दूसरी कंपनी इस प्रोजेक्ट को टेकओवर कर सकती है। गांवों में गुपचुप सर्वे करने की बात भी सामने आ रही है।

मुआवजे में भारी अंतर

इस प्रोजेक्ट में सबसे बड़ा अंतर पुराने और नए मुआवजा दरों में आ गया है। 2013 में भू-अर्जन अधिनियम लागू होने के बाद से मुअवजा चार गुना हो चुका है। जबकि ग्रामीणों को बहुत मामूली रकम मिली थी। अब पावर प्लांट लगाने के लिए विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

उद्योग विभाग ने क्या किया?

जब कोई उद्योग भू-अर्जन के बाद भी स्थापित नहीं हो पाता, तो उक्त भूमि को लेकर उद्योग विभाग निर्णय लेता है। लेकिन जेएसडब्ल्यू के मामले में उद्योग विभाग ने जमीन लैंड बैंक में भी नहीं ली और न ही कंपनी को कारखाना लगाने के लिए दबाव बनाया। तब से स्थिति जस की तस है। किसान अपनी जमीन मुक्त करने की मांग भी कर सकते हैं क्योंकि लंबा समय गुजर चुका है।