UPI Payment Rules:डिजिटल भुगतान आज हर जगह आम हो चुका है। चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक लोग UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में National Payments Corporation of India (NPCI) ने 2000 रुपये से ऊपर के कुछ ट्रांजैक्शन को लेकर नए नियम लागू किए हैं। यह बदलाव मुख्य रूप से वॉलेट आधारित मर्चेंट पेमेंट्स पर लागू होता है। आम लोगों को पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, इसलिए छोटे भुगतान करने वालों को घबराने की जरूरत नहीं है।
नए नियम की विशेषताएं
इस नए नियम के अनुसार, अगर कोई ग्राहक 2000 रुपये से अधिक की राशि वॉलेट के जरिए दुकानदार को देता है, तो 1.1 प्रतिशत तक का शुल्क मर्चेंट यानी दुकानदार को देना होगा। इसका मतलब है कि ग्राहक की जेब पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, 5000 रुपये के भुगतान पर लगभग 55 रुपये का शुल्क दुकानदार को देना होगा। वहीं, बैंक अकाउंट से किए गए भुगतान पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। इसलिए बड़े भुगतान के लिए सीधे बैंक अकाउंट का उपयोग करना फायदेमंद है।
ट्रांजैक्शन लिमिट में बदलाव
सामान्यत: UPI की दैनिक सीमा 1 लाख रुपये है। लेकिन कुछ विशेष भुगतान जैसे शिक्षा शुल्क, अस्पताल के बिल, बीमा प्रीमियम और IPO निवेश के लिए सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। वहीं कुछ पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन में लिमिट 10 लाख रुपये तक बढ़ाई गई है। यह व्यापारियों और बड़े लेनदेन करने वालों के लिए राहत देने वाला कदम है।
आम ग्राहकों के लिए राहत
छोटे भुगतान करने वालों के लिए कोई बदलाव नहीं हुआ है। सब्जी वाले, किराने की दुकान या परिवार और मित्र को पैसे भेजने के लिए UPI का इस्तेमाल करने वाले लोग पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। इस तरह नए नियम का असर मुख्य रूप से वॉलेट आधारित बड़े लेनदेन पर पड़ेगा।
व्यापारियों और मर्चेंट्स पर असर
जो दुकानदार वॉलेट आधारित भुगतान स्वीकार करते हैं, उन्हें 2000 रुपये से ऊपर के लेनदेन पर शुल्क देना होगा। इससे उनकी लागत बढ़ सकती है। हालांकि व्यापारी चाहें तो ग्राहकों को बैंक अकाउंट से पेमेंट करने के लिए कह सकते हैं। इससे ग्राहक को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा। लंबी अवधि में यह नियम डिजिटल भुगतान को पारदर्शी और संतुलित बनाने में मदद करेगा।
NPCI का उद्देश्य
NPCI का लक्ष्य डिजिटल पेमेंट सिस्टम को सुरक्षित, पारदर्शी और टिकाऊ बनाना है। बड़े वॉलेट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने से प्रोसेसिंग लागत को संतुलित किया जा सकता है। इसके साथ ही बड़े लेनदेन की मॉनिटरिंग बेहतर होती है, जिससे फर्जी ट्रांजैक्शन और टैक्स चोरी पर नियंत्रण आसान होता है। यह कदम डिजिटल इंडिया मिशन को आगे बढ़ाने में भी सहायक माना जा रहा है।
उपयोगकर्ताओं के लिए सुझाव
बड़े भुगतान के लिए सीधे बैंक अकाउंट का इस्तेमाल करना बेहतर है। अपने UPI ऐप में बैंक अकाउंट को डिफॉल्ट पेमेंट मोड के रूप में सेट करें। छोटे भुगतान के लिए वॉलेट या बैंक दोनों का उपयोग किया जा सकता है। व्यापारी अपने पेमेंट सिस्टम की समीक्षा करें और ग्राहकों को सही जानकारी दें।