काउंसलिंग जारी : छत्तीसगढ़ के 10 सरकारी व 5 निजी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की 593 सीटें हैं। इन सीटों पर एडमिशन के लिए नीट पीजी क्वालिफाइड और मेरिट में आना अनिवार्य है। प्रदेश में दूसरे राउंड की काउंसलिंग चल रही है।
रायपुर। मेडिकल कॉलेजों के पीजी कोर्स एमडी-एमएस में प्रवेश के लिए छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल (सीजीएमसी) में पंजीयन जरूरी है। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने इस संबंध में सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन को पत्र लिखकर नियम का पालन कराने को कहा है। जिन छात्रों का पंजीयन नहीं है, उन्हें एक माह के अंदर अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराने को कहा है।
संचालनालय के पत्र के अनुसार एमडी-एमएस की पढ़ाई कर रहे छात्रों का सीजीएमसी में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन की कॉपी डीन कार्यालय में जमा करनी होगी। डीएमई कार्यालय ने कहा था जिन छात्रों का काउंसिल में पंजीयन नहीं है, उन्हें कॉलेज में प्रवेश न दिया जाए। इसके बाद भी कई कॉलेजों ने पालन नहीं किया। हालांकि ये कॉलेज के बजाय स्क्रूटिनी कमेटी को भी देखना था काउंसिल में पंजीयन है या नहीं। छात्रों को एमबीबीएस का भी पंजीयन करवाना है।
प्रदेश में प्रैक्टिस करनी है तो भी रजिस्ट्रेशन जरूरी
किसी भी डॉक्टर को प्रदेश में प्रैक्टिस करने के लिए सीजीएमसी पंजीयन अनिवार्य है। एमबीबीएस साढ़े चार साल का कोर्स होता है। एक साल इंटर्नशिप करने व दो साल की ग्रामीण सेवा करने के बाद छग मेडिकल काउंसिल में स्थायी पंजीयन होता है। इसके बाद छात्र डॉक्टर बनकर प्रैक्टिस करने के लिए पात्र हो जाते हैं। हालांकि बांड में जाने के पहले अस्थायी पंजीयन का भी नियम है। दो साल की सेवा पूरी करने के बाद स्थायी पंजीयन हो जाता है। चूंकि पीजी वही छात्र कर सकता है, जिसके पास एमबीबीएस की डिग्री हो। ऐसे छात्र नीट पीजी में शामिल होते हैं और क्वालिफाइड होने पर काउंसिलिंग के लिए भी पात्र होते हैं।
ऑल इंडिया व सेंट्रल पूल कोटे में दूसरे राज्यों के भी छात्र
ऑल इंडिया व सेंट्रल पूल कोटे में प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों के छात्र भी प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। ये छात्र पीजी की पढ़ाई के लिए पात्र होते हैं। अब दस्तावेज सत्यापन के दौरान काउंसिल में पंजीयन भी देखा जा रहा है। काउंसिल पंजीयन कराने वाले छात्रों को रजिस्ट्रेशन नंबर जारी करता है। इसके बाद प्रैक्टिस व नौकरी की जा सकती है। प्रदेश में नेहरू मेडिकल कॉलेज में सबसे ज्यादा 146 पीजी की सीटें हैं। हालाकि 4 सीटें कम हो गई हैं। यहां पीजी की 150 सीटें थीं। ज्यादातर छात्र क्लीनिकल विभागों में एडमिशन लेते हैं, क्योंकि इसमें प्रैक्टिस का मौका ज्यादा मिलता है।