आयोजन समिति के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत कथा के प्रथम दिवस 8 जून को प्रातः 10 बजे पोथी यात्रा से की जाएगी, जो श्री राम मंदिर, वीआईपी रोड से प्रारंभ होकर जैनम मानस भवन पहुंचेगी। इसके पश्चात दोपहर 3:30 बजे से श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ होगा। कथा प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे से आयोजित की जाएगी।
द्वितीय दिवस 9 जून को शाम 6 बजे श्री कपिल जन्मोत्सव मनाया जाएगा। तृतीय दिवस 10 जून को प्रातः 9:30 बजे मंडल पूजा तथा शाम 6 बजे श्री नरसिंह प्राकट्य एवं माड़ा पेरामणि कार्यक्रम आयोजित होंगे।
चतुर्थ दिवस 11 जून को शाम 6 बजे श्री वामन जन्म, श्रीराम जन्म एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की मनोहारी झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी। पंचम दिवस 12 जून को श्री गोवर्धन पूजा एवं चुनरी मनोरथ का आयोजन होगा।
षष्ठम दिवस 13 जून को प्रातः 9:30 बजे यज्ञोपवीत संस्कार तथा शाम 6 बजे श्री रुक्मणी विवाह महोत्सव संपन्न होगा। कथा के अंतिम दिवस 14 जून को प्रातः 9:30 बजे सुदामा चरित्र का वर्णन किया जाएगा। इसके पश्चात कथा विराम, हवन एवं महाप्रसाद वितरण के साथ आयोजन का समापन होगा।
श्री लोहाणा महाजन ने समस्त धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से कथा श्रवण एवं विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागी बनकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।
श्रीमद भागवत कथा का महत्व
सनातन धर्म के 18 पवित्र पुराण हैं, जिनमें एक भागवत् पुराण भी है। इसे श्रीमद्भागवत या केवल भागवतम् भी कहते हैं। यह जगत के पालक श्रीविष्णुजी के धरती पर लिए गए 24 अवतारों के साथ उस दौरान उनके जीवन की कथा का भावपूर्ण वर्णन है। 12 खंडों के इस ग्रंथ में 335 अध्याय तथा 18 हजार श्लोक हैं। इसके 10वें अध्याय में श्रीकृष्ण का जीवन सार कुछ इस प्रकार वर्णित है क यह समस्त प्राणियों के लिए सांसारिक जीवन जीते हुए ज्ञान तथा मुक्ति का मार्ग दिखाता है।
श्रीमद्भागवत कथा सुनना और सुनाना दोनों ही मुक्तिदायिनी है तथा आत्मा को मुक्ति का मार्ग दिखाती है। भागवत पुराण को मुक्ति ग्रंथ कहा गया है, इसलिए अपने पितरों की शांति के लिए इसे हर किसी को आयोजित किया जाता है। इसके अलावा रोग-शोक, पारिवारिक अशांति दूर करने, आर्थिक समृद्धि तथा खुशहाली के लिए भी इसका आयोजन किया जाता है।
श्रीमद्भागवत कथा जीवन-चक्र से जुड़े प्राणियों को उनकी वास्तविक पहचान करता है, आत्मा को अपने स्वयं की अनुभूति से जोड़ता हैं तथा सांसारिक दुख, लोभ-मोह- क्षुधा जैसी तमाम प्रकार की भावनाओं के बंधन से मुक्त करते हुए नश्वर ईश्वर तथा उसी का एक अंश आत्मा
से साक्षात्कार कराता है।