रायपुर। प्रदेश में उद्योगों की स्थापना और निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी का गठन किया है। अब उद्योग और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से संबंधित लाइसेंस, अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) तथा विभिन्न विभागीय अनुमोदनों के आवेदनों की नियमित समीक्षा होगी और उन्हें निर्धारित समय-सीमा के भीतर निपटाने की जिम्मेदारी तय की जाएगी। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इससे निवेशकों को राहत मिलेगी और औद्योगिक निवेश का माहौल बेहतर होगा। वाणिज्य एवं उद्योग विभाग ने इसे राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी का नाम दिया है, जिसमें वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव, नोडल एजेंसी के संयोजक होगे। वे सीधे इसकी मॉनिटरिंग करेंगे। दरअसल, लंबे समय से सिंगल विंडो सिस्टम के बावजूद विभिन्न विभागों में फाइलें लंबित रहने और समय-सीमा के भीतर मंजूरी नहीं मिलने की शिकायते सामने आ रही थीं। कई निवेशकों का कहना था कि ऑनलाइन आवेदन के बाद भी विभागीय स्तर पर फाइलों का निराकरण समय पर नहीं हो पा रहा है, जिससे परियोजनाएं प्रभावित हो रही है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल कर राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी का गठन किया है। इस संबंध में 8 जून को उद्योग सचिव रजत कुमार ने आदेश जारी कर दिया है।
नई व्यवस्था के तहत एजेंसी सिंगल विंडो पोर्टल पर प्राप्त सभी आवेदनों और उनके निराकरण की स्थिति की समीक्षा करेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि कोई आवेदन निधारित समय-सीमा से अधिक समय तक लंबित रहता है तो एजेंसी को उसके अनुमोदन पर सीधे निर्णय लेने का अधिकार भी होगा। इससे विभागीय स्तर पर होने वाली अनावश्यक देरी पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
टर्न अराउंड टाइम की भी होगी समीक्षा
एजेंसी विभिन्न सेवाओं के लिए निर्धारित समय-सीमा और उद्योगों की स्थापना एवं संचालन से जुड़े टर्न अराउंड टाइम की भी समीक्षा करेगी। जरूरत पड़ने पर इन समय-सीमाओं में संशोधन किया जा सकेगा। साथ ही निवेशकों की सुविधा के लिए राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड और थर्ड पाटी एजेंसियों के कार्यों का मूल्यांकन भी किया जाएगा। सरकार ने नोडल एजेंसी को प्रदेश को निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने, नई निवेश नीतियों को बढ़ावा देने और बड़े निवेश आकर्षित करने की जिम्मेदारी भी सौंपी है। माना जा रहा है कि इससे उद्योगों की लंबित फाइलों का तेजी से निराकरण होगा और प्रदेश में निवेश की रफ्तार बढ़ेगी।
औद्योगिक विकास नीति 2024-30
राज्य सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की पेशकश की है। इसमें पूंजी निवेश के साथ ही ब्याज सब्सिडी, पेटेंट, स्टाम्प ड्यूटी शुल्क पूंजी निवेश सब्सिडी आदि शामिल हैं। नोडल एजेंसी इन सभी विषयों पर मी समीक्षा करेगी।