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पश्चिम एशिया संकट से व्यापार व एमएसएमई पर असर की आशंका, कैट ने सरकार से राहत उपाय और टास्क फोर्स गठन की मांग

रायपुर। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के व्यापार और उद्योग पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। देश के प्रमुख व्यापारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार से तत्काल राहत उपाय लागू करने और एक विशेष टास्क फोर्स के गठन की मांग की है। कैट के राष्ट्रीय वाइस चेयरमेन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य अमर पारवानी सहित छत्तीसगढ़ इकाई के पदाधिकारियों—जितेंद्र दोशी, विक्रम सिंहदेव, परमानंद जैन, सुरिंदर सिंह, अजय अग्रवाल, राजेंद्र जग्गी, राम मंधान, वासु मखीजा, भरत जैन, राकेश ओचवानी और शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट से खासतौर पर छोटे व्यापारियों और एमएसएमई क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन को भेजे पत्र में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सक्रिय निगरानी और समयबद्ध हस्तक्षेप के चलते वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आपूर्ति श्रृंखला अब तक मजबूत बनी हुई है। संगठन के अनुसार, स्रोतों के विविधीकरण, लॉजिस्टिक्स सुधार और वित्तीय प्रबंधन जैसे कदमों से आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों में संतुलन बना हुआ है। हालांकि, कैट ने चेताया है कि मौजूदा संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, आपूर्ति बाधाएं और उत्पादन लागत में इजाफा होने की संभावना है, जिसका असर पेट्रोकेमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, प्लास्टिक, टेक्सटाइल, उर्वरक, केमिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है।

निर्यातकों के सामने भी नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। फ्रेट और बीमा लागत में वृद्धि, शिपमेंट में देरी, रूट परिवर्तन और भुगतान संबंधी अनिश्चितताओं से उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होने का खतरा है।

कैट ने सरकार से मांग की है कि एमएसएमई और छोटे व्यापारियों को ऋण चुकौती में अतिरिक्त समय दिया जाए, प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष क्रेडिट गारंटी योजना लाई जाए और गंभीर रूप से प्रभावित उद्योगों के लिए ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाए। साथ ही, ईंधन और कच्चे माल की कीमतों की निगरानी व स्थिरीकरण के उपाय किए जाएं तथा निर्यातकों को फ्रेट व बीमा सहायता के साथ शीघ्र रिफंड सुनिश्चित किया जाए। संगठन ने “वेस्ट एशिया इम्पैक्ट असेसमेंट एवं रिस्पॉन्स टास्क फोर्स” के गठन का भी सुझाव दिया है, जिसमें संबंधित मंत्रालयों, आरबीआई, व्यापार संगठनों और विशेषज्ञों को शामिल कर स्थिति का लगातार आकलन किया जाए और समय पर नीतिगत निर्णय लिए जा सकें। कैट ने विश्वास जताया कि समय रहते ठोस कदम उठाए जाने पर भारत इस वैश्विक चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना कर सकेगा और व्यापार एवं उद्योग की स्थिरता बनाए रखेगा। संगठन के अनुसार, “समय पर उठाए गए कदम ही आर्थिक स्थिरता की गारंटी हैं।