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हीरा ग्रुप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने की बड़ी कार्रवाई

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ईडी (ED) ने हीरा ग्रुप की 159 करोड़ रुपये की 23 संपत्तियों की नीलामी की है. हीरा ग्रुप ने देश भर के निवेशकों से सालाना 36% से ज्यादा का रिटर्न देने का वादा करके करीब 6 हजार करोड़ रुपये की रकम जमा की थी।

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 159 करोड़ रुपए मूल्य की 23 अटैच की गई अचल संपत्तियों की नीलामी सफलतापूर्वक पूरी कर ली है।

हैदराबाद जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के खिलाफ की

ईडी के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई आरोपी नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और उनसे संबंधित संस्थाओं के खिलाफ की है।

ईडी के अनुसार, नोहेरा शेख और उनकी कंपनियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान यह सामने आया था कि उन्होंने निवेशकों को सालाना 36 प्रतिशत से अधिक रिटर्न का लालच देकर देशभर के लोगों से 5,978 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जुटाई थी।

निवेशकों को उनकी मूल राशि तक वापस नहीं मिल सकी, जिससे हजारों लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई

हालांकि बाद में निवेशकों को उनकी मूल राशि तक वापस नहीं मिल सकी, जिससे हजारों लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई।प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में 19 जून को मेटल स्क्रैप ट्रेड कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएसटीसी) के माध्यम से इन संपत्तियों की नीलामी कराई गई।

नीलामी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी तरीके से आयोजित की गई, ताकि अधिकतम मूल्य प्राप्त किया जा सके। ईडी द्वारा नीलाम की गई संपत्तियां उन परिसंपत्तियों में शामिल हैं जिन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अटैच किया गया था।

पीएमएलए की निर्णायक प्राधिकरण ने भी इन संपत्तियों की जब्ती की पुष्टि की

जांच में इन्हें अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) से खरीदी गई संपत्ति के रूप में चिन्हित किया गया था। पीएमएलए की निर्णायक प्राधिकरण (एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी) ने भी इन संपत्तियों की जब्ती की पुष्टि की थी।

एजेंसी ने कहा कि नीलामी से प्राप्त धनराशि का उपयोग वास्तविक निवेशकों और पीड़ितों को मुआवजा देने तथा उनका पैसा लौटाने के लिए किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और निर्देशों के तहत संचालित होगी। जांच के दौरान नोहेरा शेख पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप भी लगा। इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी थी।

हैदराबाद की विशेष पीएमएलए अदालत ने 7 मई 2026 को उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया

इसके बाद हैदराबाद की विशेष पीएमएलए अदालत ने 7 मई 2026 को उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। ईडी ने 21 मई 2026 को उन्हें गुरुग्राम से गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

ईडी ने उनकी निजी सहायक नाजनीन अंसारी उर्फ अबीदा को भी गिरफ्तार किया है। एजेंसी का आरोप है कि वह अपराध से अर्जित धन के प्रबंधन और संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया में बाधा डालने में शामिल थी। फिलहाल वह भी न्यायिक हिरासत में है। ईडी ने कहा कि निवेशकों को उनका धन वापस दिलाने और अपराध से अर्जित संपत्तियों के प्रभावी परिसमापन के लिए आगे की जांच जारी है।