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शेयर बाजार में क्रैश का खतरा आज खुलते ही? निवेशकों को लग सकता है बड़ा झटका

2 मार्च को शेयर बाजार (Share Market) में गिरावट आ सकती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते संकट की वजह से सोमवार को शेयर बाजार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. भारत में मंगलवार को होली के कारण शेयर बाजार बंद रहेगा।

विश्लेषकों के अनुसार मिडिल ईस्ट में बढ़ते संकट की वजह से सोमवार को शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है. बाजार पर असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संघर्ष कितने समय तक चलता है. शनिवार को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया. ईरानी सरकारी मीडिया ने रविवार को पुष्टि की कि Ayatollah Ali Khamenei इस हमले में मारे गए।

इन कारणों से शेयर बाजार में बड़ी हलचल संभव
विशेषज्ञों ने कहा कि जियोपॉलिटिकल स्थिति, मैक्रोइकोनॉमिक डेटा, वैश्विक बाजार रुझान और विदेशी निवेशकों की ट्रेडिंग गतिविधियां भी निवेशकों की भावना को प्रभावित करेंगी. बताते चलें कि आने वाले हफ्ते में मंगलवार को होली (Holi) के कारण इक्विटी बाजार बंद रहेंगे।

बाजार की धारणा कमजोर
स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के रिसर्च हेड संतोष मीना ने कहा कि मिडिल ईस्ट में हालिया घटनाओं के बाद बाजार की धारणा और कमजोर हो गई है. उन्होंने कहा कि भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए लगातार ऊंची क्रूड कीमतें (Crude Oil Price) महंगाई, वित्तीय संतुलन और ब्याज दर में कटौती की उम्मीदों के लिए जोखिम पैदा करती हैं।

निवेशक रहे सतर्क
उन्होंने कहा कि सोमवार को बाजार सावधानी भरे या नकारात्मक रुख के साथ खुल सकते हैं. निवेशक तीसरी तिमाही के जीडीपी डेटा (GDP Data), मासिक ऑटो बिक्री के आंकड़े और आगामी IIP तथा PMI आंकड़ों पर भी नजर रखेंगे।

ग्लोबल स्तर पर बड़ा एक्शन संभव
वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन के आर्थिक आंकड़े, क्रूड कीमतों की दिशा और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का प्रवाह निकट अवधि में बाजार की दिशा तय करेगा. ब्रेंट क्रूड 2.87 प्रतिशत बढ़कर 72.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा ने कहा कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित किया है. भारत जैसे देश के लिए ऊंची ऊर्जा कीमतों से महंगाई का दबाव बढ़ा है।

क्रूड कीमतें ऊंची रही तो…
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि निकट अवधि में बाजार पर असर नकारात्मक रहेगा. अगर क्रूड कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो व्यापार संतुलन और भुगतान संतुलन प्रभावित हो सकता है क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है।

रिलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के अनुसार पिछले हफ्ते लगातार जियोपॉलिटिकल तनाव और टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी के कारण बाजार दबाव में रहा. पिछले हफ्ते बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 1,527.52 अंक या 1.84 प्रतिशत गिरा जबकि निफ्टी (Nifty 50) 392.6 अंक या 1.53 प्रतिशत नीचे आया. घरेलू स्तर पर निवेशक मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI, औद्योगिक उत्पादन डेटा और मासिक ऑटो बिक्री के आंकड़ों पर मांग की स्थिति का आकलन करने के लिए नजर रखेंगे।