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औद्योगिक भूमि के आबंटन नियम में बदलाव: सर्विस सेक्टर को भी मिलेगी अब औद्योगिक भूमि

  • 6 माह में उपयोग नहीं तो अतिरिक्त जमीन वापस
  • छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम 2015 में महत्वपूर्ण संशोधन 

निवेश के आधार पर जमीन की नई सीम

  • 1000 वर्गमीटर सूक्ष्म उद्यम 
  • 5 हेक्टेयर अधिकतम माध्यम उद्यम
  • 25 हेक्टेयर अधिकतम वृहद उद्यम
  • 25 हेक्टेयर से अधिक भी संभव 100 करोड़ से अधिक निवेश-

रायपुर। राज्य सरकार ने औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम 2015 में महत्वपूर्ण संशोधन किए है। नई अधिसूचना के मुताबिक अब सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) की इकाइ‌यों को भी औद्योगिक भूमि आवंटित की जा सकेगी। साथ ही बड़े निवेशकों को अधिक भूमि देने, खाली जमीन वापस लेने और बैंक नीलामी वाली इकाइयों को राहत देने जैसे कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए है। इससे पहले मैन्युफेक्चरिंग इंडस्ट्रीज स्टील, स्पंज, मिनी स्टील प्लांट, फेरो एलाइज, मशीनरी आदि सेक्टर की ही औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि का आवंटन किया जाता था, लेकिन अब सेवा क्षेत्र के उद्योगों को भी जमीनों का आवंटन हो सकेगा। इस संबंध में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार ने 23 अप्रैल को आदेश जारी कर दिया है। इसके मुताबिक कंपनियों के पुनर्गठन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए है।

सेवा क्षेत्र को पहली बार औद्योगिक जमीन

नई व्यवस्था के तहत आईटी, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, हेल्थ, एजुकेशन जैसे सेवा क्षेत्र की इकाइयों को भी औद्योगिक भूमि मिल सकेगी, बशर्ते संबंधित भूमि उपयोग में इसकी अनुमति हो। इससे औद्योगिक क्षेत्रों में सेवा आधारित निवेश बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

बैंक नीलामी में खरीदी जमीन पर राहत

यदि बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा किसी औद्योगिक इकाई की नीलामी होती है तो नया खरीदार केवल 10 प्रतिशत प्रीमियम देकर भूमि हस्तांतरण करा सकेगा। इससे बंद उद्योगों को फिर से शुरू करने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार ने पीपीपी मॉडल से विकसित औद्योगिक क्षेत्र, लैंड बैंक और परियोजनाओं के लिए सीएसआईडीसी को अलग नियम बनाने का अधिकार दिया है। यदि आवंटित भूखंड को सड़क संपर्क नहीं है तो प्राधिकरण एप्रोच रोड के लिए अलग से भूमि आवंटित कर सकेगा।

खाली जमीन पर सख्ती

यदि आवंटित भूमि का निर्धारित में उपयोग नहीं किया गया तो 10 प्रतिशत प्रीमियम लेकर केवल 6 माह का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इसके बाद भी उपयोग नहीं होने पर अतिरिक्त भूमि वापस ली जाएगी। चालू इकाइयां जरूरत से ज्यादा भूमि का आंशिक समर्पण कर सकेंगी, लेकिन 50 प्रतिशत से अधिक जमीन नहीं लौटाई जा सकेगी। समर्पण पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा और लौटाई गई भूमि नए निवेशक को दी जाएगी।