नई दिल्ली। अनिल अग्रवाल ने अमेरिका में करीब ₹47,000 करोड़ (5 बिलियन डॉलर) के बड़े निवेश की घोषणा करते हुए भारत को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि समय रहते तेजी से फैसले नहीं लिए गए, तो वैश्विक अवसर हाथ से निकल सकते हैं।
अमेरिका के टेक्सास राज्य के ह्यूस्टन में आयोजित प्रतिष्ठित ऊर्जा सम्मेलन CERAWeek से लौटने के बाद अग्रवाल ने कहा कि, “मैं ₹47,000 करोड़ लेकर अमेरिका पहुंचा हूं, क्योंकि वहां काम करने की आजादी और तेजी से निर्णय लेने का माहौल है।”
अमेरिका की कार्यसंस्कृति की सराहना
अग्रवाल ने अमेरिकी कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि वहां का सबसे बड़ा आकर्षण तेजी से निर्णय लेने की क्षमता और कम प्रक्रियात्मक बाधाएं हैं। उनके मुताबिक, यही कारण है कि निवेशक तेजी से आगे बढ़ पाते हैं।
भारत के लिए सीधा संदेश
उन्होंने भारत के संदर्भ में कहा कि देश में संसाधनों और प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।
- खनिज, तेल और गैस के विशाल भंडार।
- कुशल मानव संसाधन।
- बेहतर होती नीतिगत व्यवस्था।
लेकिन इसके बावजूद जरूरत है तेज निर्णय लेने और क्रियान्वयन की गति बढ़ाने की।
एनर्जी सेक्टर में बड़ा विजन
Vedanta Group के चेयरमैन ने बताया कि कंपनी अमेरिका में सर्विसेज, ड्रिलिंग, टेक्नोलॉजी और नई साझेदारियों में निवेश करेगी। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि वेदांता आने वाले वर्षों में तेल और गैस उत्पादन को 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य रख रही है।
भारत को क्या करना चाहिए?
अग्रवाल ने सुझाव दिया कि भारत को भी वैश्विक स्तर के बड़े ऊर्जा आयोजनों की मेजबानी करनी चाहिए, ताकि दुनिया देश की क्षमता को नजदीक से देख सके। उन्होंने यह भी कहा कि अब प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को नकारात्मक नजर से नहीं, बल्कि विकास और आत्मनिर्भरता के साधन के रूप में देखना चाहिए।