एसो. ने अपने बयान में कहा कि इस प्रकार की गंभीर औद्योगिक दुर्घटना की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि हादसे के वास्तविक कारण सामने आ सकें। साथ ही जिन व्यक्तियों या प्रबंधन की लापरवाही इस घटना में सामने आती है, उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। मृतकों एवं घायलों को नियमानुसार उचित मुआवजा देने की भी मांग की गई है।
वहीं, वेदांता कंपनी के चेयरमेन श्री अनिल अग्रवाल के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को लेकर एसोसिएशन ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि वेदांता ग्रुप देश की एक प्रमुख औद्योगिक कंपनी है, जिसने बड़े स्तर पर निवेश कर हजारों लोगों को रोजगार प्रदान किया है। एसोसिएशन के अनुसार, चेयरमेन सीधे तौर पर फैक्ट्री संचालन में संलग्न नहीं होते हैं, ऐसे में बिना ठोस जांच के उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करना उचित नहीं है।
एसो. ने यह भी कहा कि इस तरह की कार्रवाई से बाहरी निवेशकों के बीच नकारात्मक संदेश जा सकता है, जिससे राज्य में औद्योगिक निवेश, रोजगार और राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने मांग की कि जैसे सरकारी उपक्रमों में दुर्घटना की स्थिति में सीधे चेयरमेन पर एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, उसी प्रकार निजी कंपनियों के लिए भी समान मापदंड अपनाए जाने चाहिए। उरला इंडस्ट्रीज एसो. ने राज्य सरकार से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए औद्योगिक माहौल को संतुलित बनाए रखने की अपील की है।