- औद्योगिक अपशिष्ट से बनाया जैव उर्वरक
- पांच स्तरीय प्रोसेस से बने इस जैव उर्वरक से मिट्टी में पीएच संतुलन बेहतर होता है और जैविक सक्रियता बढ़ती है।
ओडिशा के राउरकेला के स्टील प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट को क्षेत्र की डॉ. शितरश्मि साहू ने एक जैव उर्वरक में बदल दिया। जो किसानों की पैदावार बढ़ाने कारगर साबित हो रहा है। डॉ. साहू बताती हैं कि रासायनिक खादों के अधिक प्रयोग से क्षेत्र की मिट्टी कमजोर हो रही है। पीएचडी की पढ़ाई के दौरान उन्होंने पाया कि स्टील प्लांट के एलडी स्लैग में मौजूद खनिज मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के काम आ सकते हैं। इसलिए उन्होंने ऐसा जैव उर्वरक तैयार किया जो विषाक्त तत्त्वों को नियंत्रित करते हुए मिट्टी में जीवाणुओं की सक्रियता बढ़ाता है और फसलों को अतिरिक्त पोषण देता है। 2020 में शुरू किए गए अपने स्टार्टअप से वे किसानों को जैव उर्वरक उपलब्ध करवा रही हैं। जिससे धान जैसी मुख्य फसलों का उत्पादन 20 प्रतिशत तक बढ़ा है।
कृषको को लाभ
वह कहती हैं कि उनके दादा के पास काफी खेती की जमीन थी, लेकिन औद्योगिक स्टील प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट के प्रभाव से भूमि बंजर हो गई और उन्हें खेती करनी छोड़नी पड़ी। उनके दादा की तरह ही अन्य किसानों ने भी इसी तरह की समस्या का सामना किया। इसलिए वे हमेशा से इसका स्थाई समाधान चाहती थीं। उनके इस प्रयोग से 500 से अधिक किसानों को लाभ मिला है। वह हर माह दो हजार टन जैव उर्वरक का उत्पादन करती हैं और किसानों को इसके प्रयोग का प्रशिक्षण देती हैं।
पांच चरण की है इसकी प्रक्रिया
वह बताती हैं कि प्लांट के अपशिष्ट में पोटेंशियल खनिज मौजूद थे। इसलिए उन्होंने एक विशेष पांच चरणीय प्रोसेसतैयार किया। जो स्लैग में मौजूद खतरनाक तत्त्वों को नियंत्रित करता है, माइक्रोबियल गतिविधि बढ़ाता है।